हाइकु #1

हाइकु
1) विरह गीत
गुनगुनाती है वो,
वर्षा ऋतु में
2) सर्द रात्रि में,
है गर्म रजाई सी,
माँ तेरी याद
3) एक शाम थी
तुम थी, मैं था और
थी तन्हाई
© विकास नैनवाल ‘अंजान’

About विकास नैनवाल 'अंजान'

मैं एक लेखक और अनुवादक हूँ। फिलहाल हरियाणा के गुरुग्राम में रहत हूँ। मैं अधिकतर हिंदी में लिखता हूँ और अंग्रेजी पुस्तकों का हिंदी अनुवाद भी करता हूँ। मेरी पहली कहानी 'कुर्सीधार' उत्तरांचल पत्रिका में 2018 में प्रकाशित हुई थी। मैं मूलतः उत्तराखंड के पौड़ी नाम के कस्बे के रहने वाला हूँ। दुईबात इंटरनेट में मौजूद मेरा एक अपना छोटा सा कोना है जहाँ आप मेरी रचनाओं को पढ़ सकते हैं और मेरी प्रकाशित होने वाली रचनाओं के विषय में जान सकते हैं।

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5 Comments on “हाइकु #1”

  1. बहुत अच्छा है। हिन्दी में भी लिख सकते हैं, ऐसा ख़्याल नहीं आया। 🙂

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