सितंबर 2023 – बुक हॉल

वैसे तो किताबें अक्सर ही घर में आती रहती हैं लेकिन किसी किसी महीने ये तादाद इतनी अधिक हो जाती है कि इन्हें यहाँ साझा करने का मन  हो ही जाता है। 

महीने में मँगवाई किताबों के विषय में पहले भी यदा कदा पोस्ट करता रहता हूँ। लेकिन फिर जब मुझे लगने लगता है कि यहाँ उसके सिवा कुछ और पोस्ट नहीं हो रहा तो पोस्ट करना छोड़ देता हूँ। अब एक ही तरह के विषय पर लिखना मुझे भी उकता देता है तो आपको तो उकताएगा ही। पर इस बार काफी दिनों से पोस्ट नहीं किया था तो सोचा कि कर ही देते हैं। फिर इस बार इतनी किताबें मँगवाने का एक कारण भी था। 
हुआ ये कि अगस्त के आखिरी हफ्ते में मेरा घर (पौड़ी) जाना हुआ। और इस बार हम घर काफी दिन रुक गए। यानी लगभग एक माह तो ठहरे ही थे। 
घर में भी मेरे पास ऐसी किताबें रखी हुई हैं जो अभी तक मैंने पढ़ी नहीं थी इस बार वहाँ मैंने कोई किताबें नहीं मँगवाई। ये एक माह किसी तरह गुजरे लेकिन जब यहाँ वापस आया तो किताबें मँगवाने का सिलसिला ऐसे शुरू हुआ कि किताबें यूँ आने लगी जैसे बराज खुलने पानी आने लगता है।
 
पोस्ट की बात करूँ तो ये  पोस्ट सितंबर समाप्त होते ही आ जानी चाहिए थी लेकिन ऐसा व्यस्त हो गया कि पोस्ट पूरा करने में टाइम लग गया। अब ज्यादा देर न करते हुए सितंबर का जो लॉट आया है उसे आपके समक्ष पेश कर रहा हूँ। 

इस बार किताबें दो तीन स्रोतों से मँगवाई थी। अमेज़न, नैशनल बुक ट्रस्ट की वेबसाईट और फेसबुक से मिली जानकारी के मध्यम से।

अमेजन

अमेज़न किताबें पहुँचाने के मामले में मुझे अच्छा लगता है। मेरी अधिकतर किताबें इधर से ही आती हैं। इस बार भी सबसे बड़ा लॉट इधर से ही आया। वैसे तो अक्सर अमेज़न के अनुभव ठीक ही रहते हैं लेकिन इस बार दो अनुभव हुए। पहला ये कि दो बार ऐसा हुआ कि जो किताब मँगवाई थी उसके बजाए कोई और किताबें पहुँचा दी गई। फिर उनको बदलकर सही किताब भेजने का ऑर्डर किया। उनमें से एक तो इस पोस्ट को लिखने तक आ चुकी है और दूसरी नहीं ही आई क्योंकि दूसरे बार भी अमेज़न की तरफ से गलत ही किताब पहुँचाई गई जिसे मैंने वापस करके पैसे ही रिफंड ले लिए थे। 

 

इसके अलावा एक किताब है काका कालेकर की यात्रा का आनंद। मैं कई वर्षों से इसे खोज रहा हूँ। गुजराती में तो मिल जाती है हिंदी में नहीं मिलती। अचानक से अमेज़न में दिखी तो बिना कोई देरी किए मँगवा दी। किताब हार्डकवर में थी और डिलिवरी चार्ज भी था। वो भी दिया लेकिन जब किताब आई तो मूड खराब हो गया। किताब सेलर ने इंडिया पोस्ट से बुक पोस्ट करके भेजी थी। हार्ड कवर का कवर मुड़ तुड़ गया था और किताब फट भी गई थी। किताब पुरानी भी लग रही थी। देखते ही उसे भी रिपलेसमेंट  के लिए डाल दी। 

रिटर्न के लिए डाली तो सेलर का कॉल आ गया। उन्हें बताया तो उन्होंने कहा दूसरी किताब भी पुरानी ही है और वो भेजेंगे इंडिया पोस्ट से और संभावना है कि वो भी ऐसी ही हालत में पहुँचे। ऐसे में रिपलेसमेंट के बजाए रिफंड करना बेहतर होगा। सेलर भाई साहब की बात भी सही थी तो एक बार फिर यात्रा का आनंद निकल गई और मैंने रिफंड करवा लिया। 

किताब ऐसे आई। एक दो पेज फटे भी थे तो भारी मन से रिटर्न करनी पड़ी

बहरहाल अमेज़न से जो पुस्तकें आई वो पुस्तकें ये हैं:

अमेज़न से ली पुस्तकें

वसंत के हत्यारे 

वसंत के त्यारे लेखक हृषिकेश सुलभ का कहानी संग्रह है। इस कहानी संग्रह में उनकी निम्न 9 कहानियों को संकलित किया गया है:

भुजाएँ, खुला, वसंत के हत्यारे, स्वप्न जैसे पाँव, फज़र की नमाज़, काबर झील का पाखी, कुसुम कथा, डाइन, हाँ, मेरी बिट्टू

पुस्तक लिंक: अमेजन

डस्ट चाइल्ड 

डस्ट चाइल्ड वियतनामी उपन्यासकार गुएन फान क्वे माई का लिखा उपन्यास है। वियतनाम युद्ध और वर्तमान काल में इस उपन्यास की कथा चलती है। यहाँ वियतनाम युद्ध के दौरान की दो बहनें हैं जो अपने गरीब अभिभावकों की मदद करने के लिए नौकरी की तलाश में साइगॉन आती हैं और एक बार में बार गर्ल बन जाती है। एक पायलट है जो वियतनाम युद्ध के दौरान अपने किए गए कृत्यों के कारण ग्लानि से भरा हुआ और शांति की तलाश में लौटता है। यहाँ एक युवक है जिसे उसके अमेरिकी पिता और वियतनामी माँ दोनों ने त्याग दिया है। वह अपनी अस्तित्व की तलाश में भटक रहा है और चाहता है कि वह दुनिया को बताए कि वह बुई डोई नहीं है। इन किरदारों की, इनकी इच्छाओं और उन इच्छाओं को पूरा करने की कहानी इस उपन्यास का कथानक बनता है। 

मुझे विषय वस्तु रोचक लगी तो मैंने इसे ले लिया। 

पुस्तक लिंक: अमेजन

वेलकम टू आरामपुर

वेलकम टू आरामपुर ध्रुव नाथ का लिखा उपन्यास है। आरामपुर एक छोटा सा पहाड़ी कस्बा है जहाँ कप्तान साहब हैं, पहलवान नाई हैं और ऐसे ही कई किरदार हैं जो कि इस कस्बे में रिहाइश को रोचक बना देते हैं। 

उपन्यास का सिनॉप्सिस जब मैंने पढ़ा था तो उससे लगा था कि इसमें हास्य के तत्व होंगे और यही चीज उपन्यास के कवर पेज पर मौजूद रस्किन बॉन्ड के ब्लर्ब से भी पता लगती है। हास्य उपन्यास पढ़ना मुझे पसंद है और पहाड़ी कस्बे से मैं खुद आता हूँ कि उपन्यास में मेरी रुचि होना लाजमी था। यही कारण है बिना देरी के इसे मँगवा दिया। 

वो अलग बात है कि अमेज़न ने पहले इसके बदले कोई दूसरा उपन्यास भेजा था और फिर रिपलेस करने पर सही उपन्यास आया। 

खैर अब आ तो चुका है। देखना है पढ़ना कब होता है। 

पुस्तक लिंक: अमेजन

इलाज अनफिनिशड बिजनेस 


इलाज अनफीनिश्ड बिजनेस गायत्री का लिखा उपन्यास है। ये एक कोज़ी मिस्ट्री जिसे लेखिका ने बेरी शोला नामक पहाड़ी कस्बे में बसाया है। चूँकि मैं खुद पहाड़ से आता हूँ और मुझे कोज़ी मिस्ट्री पढ़ना भी पसंद है तो इस किताब को लेने में मुझे दो बार सोचना न पड़ा। 

किताब के बारे में

पियू एक चालीस साल के आस पास की उम्र की थेरापिस्ट है जो अपनी पुरानी जिंदगी छोड़ बेरी शोला नामक हिल स्टेशन में आती है। यहाँ उसका बिजनेस तो इतना अच्छा नहीं चल रहा है लेकिन कस्बे में उसके अतरंगी मरीज और उसकी खुद की व्यक्तिगत ज़िंदगी में इतनी चीजें होती रहती हैं जो उसे व्यस्त रखने के लिए काफी हैं।

 

पर फिर वहाँ होंने वाले वार्षिक फूल महोत्सव से वहाँ एक रोज नाम की महिला का कत्ल हो जाता है और इला नाम की मरीज पियू को बताती है कि उसे यकीन है कि उससे एक कत्ल हो गया है।

आगे क्या होता है यही कहानी बनती है।

पुस्तक लिंक: अमेजन

ओल्ड रोड्स न्यू रोड्स 

ओल्ड रोडस न्यू रोडस रस्किन बॉन्ड के लेखों का संकलन है। यात्राओं के दौरान उनके जो अनुभव रहे हैं और जिन लोगों से वो मिले हैं उन्हें उन्होंने इस पुस्तक में संकलित लेखों के माध्यम से पाठक के साथ साझा किया है। 


पुस्तक लिंक: अमेजन

शब्दों के साथ साथ 

शब्दों के साथ साथ डॉक्टर सुरेश पंत की लिखी पुस्तक है जिसमें वो हिंदी के विभिन्न शब्दों, उनकी वर्तनी, उनकी उत्पत्ति इत्यादि के विषय में लेख के माध्यम से बता रहे हैं। डॉक्टर सुरेश पंत के लेख काफी रोचक रहते हैं तो लेना तो बनता था। 

पुस्तक लिंक: अमेजन

सिमसिम 


सिमसिम गीत चतुर्वेदी का उपन्यास है। इस उपन्यास के विषय में मुझे तब पता लगा जब इसका अंग्रेजी अनुवाद  जे सी बी प्राइज फॉर लिटरेचर की लॉन्ग लिस्ट में शामिल हुआ। गीत चतुर्वेदी का नाम मैं काफी पहले से सुनता आ रहा था और उन्हें पढ़ने की इच्छा भी थी तो ये उपन्यास मँगवा लिया। 
उपन्यास में लिखा लेखकीय पढ़ा तो जाना कि यह उपन्यास एक कविता से उपजा था। लेखक के अनुसार जो कविता में कहना रहा वो उन्होंने सिमसिम नाम की 20 हजार शब्दों की कहानी में कहा और जब लगा कि उधर भी कुछ अधूरा रहा है तो उस कहानी को दोबारा लिखा और यह उपन्यास आया। इससे पहले मैंने डैन सिमंस का उपन्यास कैरियन कम्फर्ट पढ़ा था जो कि ऐसे ही एक कहानी से बना था। 

जल्द ही उपन्यास को पढ़ने की कोशिश रहेगी। 


पुस्तक लिंक: अमेजन

द रौंग गर्ल 

आर एल स्टाइन के जितने भी उपन्यास मैंने पढ़ें हैं वो बाल पाठकों को लेकर लिखे गए हैं। लगभग एक डेढ़ साल पहले नेट फलिक्स पर् उनकी एक किशोरों के लिए लिखी गई सीरीज पर् आधारित फिल्म फियर स्ट्रीट देखी थी। उस वक्त सोचा था कि इस शृंखला का उपन्यास पढ़ूँगा। अमेज़न में इस उपन्यास, द रौंग गर्ल, पर एक अच्छी डील दिखी तो इसे ले लिया क्योंकि उपन्यास का विवरण भी रोचक लग रहा था। 


किताब के बारे में 


जेक सेबर के मज़ाक ने पॉपी मिलर को उसके सहपाठियों के सामने हँसी का पात्र बना दिया था। पॉपी ने मन ही मन बदला लेने की सोच ली थी। लेकिन फिर पॉपी के क्लासमेट एक एक करके मरने लगते हैं और सबको लगने लगता है कि इसके पीछे पॉपी का हाथ है। क्या ये सच है या पॉपी को कोई फँसा रहा है?

पुस्तक लिंक: अमेजन

एक कस्बे के नोट्स 

एक कस्बे के नोट्स नीलेश रघुवंशी का लिखा उपन्यास है। वैसे तो वह कवयित्री हैं लेकिन उनके उपन्यास भी काफी प्रसिद्ध हुए हैं। कस्बे से आने के कारण कस्बाई जीवन मुझे बहुत अच्छा लगता है। इसलिए ऐसे उपन्यासों की तलाश भी रहता हूँ जिनके सहारे शहर में रहते हुए कस्बे में हो आऊँ।  सच बताऊँ तो इस उपन्यास को मैंने केवल शीर्षक देखकर उठाया था और फिर हार्डकवर में अच्छी डील मिली तो ले भी लिया। अब उपन्यास कैसा निकलता है ये तो पढ़ने के बाद ही पता लगेगा। 


किताब विवरण

नीलेश रघुवंशी की एक उपलब्धि यह है कि उसने एक ऐसे कथानक को, जिसमें भावनिकता के भयावह अवसर थे, एक निर्मम ढंग से यथार्थवादी रखा है जिसमें हास-परिहास के लिए भी गुंजाइश है। परिवार में माँ है लेकिन वह हमेशा ममतामयी और पतिपरायणा नहीं है, उसमें छिपी विद्रोहिणी कभी भी जागृत हो सकती है। इकलौता बेटा मुँहफट और दुर्विनीत है। अलग-अलग उम्रों, स्वभावों और नियतियों वाली बेटियाँ हैं लेकिन उनमें एक बराबरी का बहनापा है। उनके अपने-अपने कुँवारे और ब्याहता सपने हैं। उनकी जद्दोजहद, छोटी-बड़ी दुखान्तिकाएँ और जीवन-परिवर्तक उपलब्धियाँ भी हैं। क्या भारत सरीखे जटिल समाज में ‘फेमिनिस्ट’ सरीखे सीमित और भ्रामक शब्द की जगह ‘एक क़स्बे के नोट्स’ को हम ‘मातृवादी’ या ‘बेटीवादी’ या ‘बहनापावादी’ कह सकते हैं? और यदि पिता को लेकर इतनी समझदारी और स्नेह है तो ‘पितावादी’ भी क्यों नहीं?

शायद यह हिन्दी का पहला उपन्यास है जिसमें किसी लेखिका ने एक निम्न-मध्यवर्गीय क़स्बाई पारिवारिक जीवन को इतनी अन्तरंगता और असलियत से जीवन्त किया हो। प्रतिभा के लिए सृजन में तो कुछ भी असम्भव नहीं, किन्तु किसी पुरुष के लिए ऐसे घर-परिवार का इतना अन्दरूनी अनुभव मुश्किल ही था।


(अमेज़न में लिखा विवरण)


पुस्तक लिंक: अमेजन

द जमींदार्स घोस्ट 


द जमींदार्स घोस्ट ख्याल पटेल का लिखा उपन्यास है। सच बताऊँ तो उपन्यास का कवर तो मुझे औसत से भी नीचे का लगा था लेकिन क्योंकि इसमें भूत है और कत्ल हैं और भूतिया हवेली भी है तो लेने से खुद को रोक न पाया। हॉरर उपन्यास पढ़ना मुझे विशेष तौर पर पसंद है। अब देखते हैं ये कैसे निकलता है। कहते हैं किताबों को खरीदने का निर्णय उनके आवरण चित्र से नहीं करना चाहिए। अच्छे आवरण चित्र वाली किताबें खराब निकल जाती हैं। अब इधर तो आवरण पसंद न आने के बावजूद इसे लिया है। देखें क्या होता है। 

किताब विवरण

यह 1933 का समय है और भारत अंग्रेजों के आधीन है। ऊटी में जमींदार दिग्विजय राणा के इकलौता पुत्र वापस लौट आया है। अर्जुन को छः साल पहले सबने मरा समझ लिया था। ऐसे में उसका अचानक से प्रकट होना सबके लिए हैरत की बात है।

 

अपने पिता की आत्महत्या के बाद वह वहाँ का जमींदार बनना स्वीकार करता है। लेकिन वो नहीं जानता कि उसके खिलाफ कई लोग हैं। उसके आने के कुछ दिनों बाद ही रहस्यमय परिस्थियों में लोगों की हत्या होने लगती है। 

लोगों का मानना है कि अर्जुन के पिता दिग्विजय की आत्मा का इन हत्याओं में हाथ है। 

क्या ये सच है? 


पुस्तक लिंक: अमेजन

लोहे का बक्सा और बंदूक

लोहे का बक्सा और सन्दूक मिथिलेश प्रियदर्शी की कहानियों का संकलन है। इसमें लेखक की निम्न छः कहानियों को संकलित किया गया है:


हत्या की कहानियों का कोई शीर्षक नहीं होता, सहिया, मुनाफा, ऐन अंदर हूँ मा नंजकन, बहन का प्रेमी,  लोहे का बक्सा और बंदूक 



पुस्तक लिंक: अमेजन

 

नैशनल बुक ट्रस्ट से मँगवाई गई पुस्तकें 

अमेज़न के अलावा नैशनल बुक ट्रस्ट से पुस्तकें मँगवाई गई। वैसे तो मुझे किताब एक यानी डूबा हुआ किला ही मँगवानी थी लेकिन चूँकि वो फ्री डिलिवरी 200 से ऊपर की खरीद पर् देते हैं तो पहले मँगवाए जाने की सूची एक से दो हुई और फिर दो से तीन और तीन से चार हो गई। खैर, किताबें उम्मीद से उलट अच्छी हालत में मेरे पास पहुँची। 

ये किताबें निम्न हैं:

नैशनल बुक ट्रस्ट से मँगवाई पुस्तकें

डूबा हुआ किला 

जैसे ऊपर लिख चुका हूँ कि नैशनल बुक ट्रस्ट से एक किताब मँगवानी थी। वो किताब डूबा हुआ किला ही थी। अब हुआ ये कि कुछ दिनों पहले लेखक संजीव जायसवाल संजय का बाल उपन्यास मेरी देश की मिट्टी पढ़ा। यह एक बाल साहसिक कथा थी। हिंदी में बाल पाठकों के लिए ऐसी रचनाएँ कम ही मौजूद हैं। यह किताब लेखक ने मुझे तब भिजवाई थी जब उन्होंने उनकी अन्य किताब फिर सुबह होगी पर उन्होंने मेरा लेख देखा था। ‘मिट्टी मेरे देश की’ पढ़ने के बाद पता चला कि उन्होंने ‘डूबा हुआ किला’ नाम से भी एक बाल उपन्यास लिखा है तो वो मँगवा दिया। 
उपन्यास किस विषय में है ये तो उपन्यास में नहीं लिखा है और न ही साइट में दर्ज था पर पेज पलटने से पता चला है कि यह भी एक बाल रोमांच कथा है जिसमें काफी सारे रंगीन चित्र भी हैं। मूल कथा तो पढ़ने के बाद ही पता लगेगी लेकिन चित्रों से उपन्यास रोचक लग रहा है। 
98 पृष्ठ के इस बड़े साइज़ के उपन्यास की कीमत 120 रुपये है जो कि वाजिब है। ऊपर से नैशनल बुक ट्रस्ट की वेबसाईट से मँगवाने पर् दस से बीस प्रतिशत का डिस्काउंट मिल जाता है। 

पुस्तक लिंक: नैशनल बुक ट्रस्ट 

छलावा 

एनबीटी की एक खराबी ये है कि उधर किताबों के डिस्क्रिप्शन नहीं होते हैं। जो होता है वो बैक कवर का अंश होता है। अगर बैक कवर में किताब से संबंधित  कुछ लिखा है तो आपकी किस्मत और अगर नहीं लिखा है तो आपकी किस्मत। 
मृदुला गर्ग के उपन्यास मैंने पढ़ें हैं। जब नैशनल बुक ट्रस्ट में टहलते हुए देखा कि उन्होंने बच्चों के लिए भी कुछ लिखा है तो मँगवाने की सोची। किताब के विवरण से इतना कुछ पता नहीं चल रहा था तो मैंने पृष्ठ संख्या देख सोचा कि उपन्यास होगा। लेकिन ऐसा नहीं निकला। 
छलावा मृदुला गर्ग का लिखा बाल कथा संग्रह हैं जिसमें उनकी निम्न नौ कहानियों को संकलित किया गया है:
पोंगल पोली, बाँसफल, नहीं, अनाड़ी,मीरा नाची, छलावा, कानतोड़ उर्फ कर्णवीर, कलि में सत, जूते का जोड़, गोभी का तोड़

पुस्तक लिंक: नैशनल बुक ट्रस्ट

प्रेम जनमेजय संकलित व्यंग्य 

हिंदी व्यंग्य विधा में प्रेम जनमेजय का काफी नाम सुना है। वो व्यंग्य यात्रा नामक पत्रिका का संपादन भी करते हैं। उनके व्यंग्य पढ़ने का मन था तो ये किताब दिखी तो मँगवा ली। 
राष्ट्रीय पुस्तक न्यास (नेशनल बुक ट्रस्ट) द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक में प्रेम जनमेजय के 47 व्यंग्य संकलित किए गए हैं। 

पुस्तक लिंक: नैशनल बुक ट्रस्ट

सुदर्शन संकलित कहानियाँ

सुदर्शन की ‘साइकिल की सवारी’ बचपन में पढ़ी थी। इसके अतिरिक्त हार की जीत भी इनकी प्रसिद्ध कहानी है। इसके पश्चात उनका लिखा पढ़ने का मौका नहीं लगा। पढ़ने की चाह मन में थी। यह पुस्तक दिखी तो मँगवा ली।

इस पुस्तक में सुदर्शन की पच्चीस कहानियों को संकलित किया गया है। संपादन स्मिता चतुर्वेदी का है। 

पुस्तक लिंक: नैशनल बुक ट्रस्ट

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फेसबुक के माध्यम से प्राप्त 

फेसबुक में एक मित्र की पोस्ट दिखी जिसमें उन्होंने इस सेट की फोटो डाली थी। इस सेट में अमृतलाल वेगड़ द्वारा की गई नर्मदा परिक्रमा का वृत्तांत मौजूद है। दोस्त ने बताया कि एक भाई से व्हाट्सएप के माध्यम से  ये पुस्तक मिली थी। लेकिन उनके पास इसके सेट ही मौजूद थे। मेरे पास घर में सौन्दर्य की नदी नर्मदा पहले से ही मौजूद थी और मैं बाकी दो लेना चाहता था लेकिन जब पता लगा कि 300 रुपये में वो भाई डिलिवर कर रहे हैं तो शृंखला की तीनों पुस्तकें ही ले ली। यह पुस्तकें मध्यप्रदेश हिंदी अकादमी से प्रकाशित हुई हैं। कीमत प्रत्येक की 80-90 रुपये ही है। चूँकि यह शृंखला काफी समय से पढ़ना चाहता था तो मुझे व्यक्तिगत पर सौदा सही लगा।

अमृतलाल वेगड़ की इस नर्मदा शृंखला में निम्न पुस्तकें हैं:

  1. सौन्दर्य की नदी नर्मदा 
  2. तीरे तीरे नर्मदा 
  3. अमृतस्य नर्मदा 

पुस्तक लिंक: सौन्दर्य की नदी नर्मदा | तीरे तीरे नर्मदा  

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तो ये थी वो किताबें जो कि सितंबर में ऑर्डर की थी। इनमें से क्या कोई आपने पढ़ी हैं? अगर हाँ तो कौन सी? 

कौन सी ऐसी किताबें हैं जिन्हें आप पढ़ना चाहेंगे?

About विकास नैनवाल 'अंजान'

मैं एक लेखक और अनुवादक हूँ। फिलहाल हरियाणा के गुरुग्राम में रहत हूँ। मैं अधिकतर हिंदी में लिखता हूँ और अंग्रेजी पुस्तकों का हिंदी अनुवाद भी करता हूँ। मेरी पहली कहानी 'कुर्सीधार' उत्तरांचल पत्रिका में 2018 में प्रकाशित हुई थी। मैं मूलतः उत्तराखंड के पौड़ी नाम के कस्बे के रहने वाला हूँ। दुईबात इंटरनेट में मौजूद मेरा एक अपना छोटा सा कोना है जहाँ आप मेरी रचनाओं को पढ़ सकते हैं और मेरी प्रकाशित होने वाली रचनाओं के विषय में जान सकते हैं।

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3 Comments on “सितंबर 2023 – बुक हॉल”

  1. आपकी अध्यवसायिता का तो मैं पहले से ही क़ायल हूँ विकास जी। इस लेख को पढ़कर और भी अधिक हो गया हूँ। आपका पुस्तक-प्रेम अद्वितीय है। और नियमित पठन की इसी आदत के कारण ही आपका लेखन भी स्तरीय है। अच्छा लेखक वही हो सकता है जो अच्छा पाठक हो। आप इसका जीता-जागता उदाहरण हैं।

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