अपडेट: कुछ किताबें जो हाल में सम्पादित की हैं

अपडेट: कुछ किताबें जो हाल में संपादित की हैं

प्रकाशन के जगत से जुड़ाव अब कुछ साल पुराना हो चुका है। अनुवाद के साथ-साथ फ्रीलांस सम्पादन का कार्य भी अब लगातार कर रहा हूँ। इसके चलते अलग-अलग प्रकाशन के साथ कार्य करने का मौका मिलता है।

सम्पादन करना मुझे पसंद भी आता है क्योंकि एक किताब के निर्माण में आप अपना योगदान दे रहे होते हो। सम्पादन करते हुए मेरा ध्यान सर्वप्रथम प्लॉट होल पर रहता है। कोशिश रहती है कि कथानक में प्लॉट होल न रहें। फिर दूसरी कोशिश यह रहती है कि पढ़ते हुए कुछ कथानक में अधूरापन न लगे। कुछ चीज़ छूट रही हो तो उसे लेखक की नज़र में ले आऊँ ताकि पाठक को पढ़ते हुए अधूरेपन का अहसास न हो। साथ ही अगर कोई गैरजरूरी अंश दिखता है तो उसे भी मैं अक्सर मार्क कर देता हूँ। सम्पादन के दौरान मैं ये सब बातें फ़ाइलों में कमेंट्स के माध्यम से लेखक तक पहुँचाता हूँ और कोशिश करता हूँ कि जो मुद्दे मैंने उठाए हैं उनका निस्तारण तो हो जाए। दूसरी बात ये है कि मैं जानता हूँ कि कभी भी कोई भी किताब परफेक्ट नहीं होती है। न परफेक्ट बन ही सकती है। ऐसे में मेरी बस ये कोशिश रहती है कि लेखक के साथ मिलकर एक ईमानदार कोशिश करें जिससे कम से कम पाठक को ये तो लगे कि इस पुस्तक का जितना स्तर हो सकता था उतने तक उठाने की इसे कोशिश की गयी है।

ऊपर की बातों से इतर सम्पादन करते हुए मैं इस बात का हमेशा ध्यान रखता हूँ कि आखिर में किताब लेखक की ही है और किताब में आखिरकार उसके ही दृष्टिकोण को वरीयता मिलनी चाहिए। कई बार मुझे लगता है सम्पादक ये बात भूल जाते हैं जबकि इसे हमें नहीं भूलना चाहिए। किताब का सम्पादन करते हुए मैं ये नहीं सोचता कि लेखक के तौर पर मैं किस तरह से उस पुस्तक को लिखता। मेरी प्राथमिकता ये रहती है कि लेखक की नज़र के अनुरूप ही किताब बने। मेरी नज़र उस पर न थोपी जाए। मैं जानता हूँ कि मैं अपनी समझ से खाली कुछ ऐसी बातें सुझा सकता हूँ जो मेरे अनुसार किताब को बेहतर बना सकती हैं। ऐसी बातें जिनको शामिल कर लिया जाए तो मेरे अनुसार लेखक जो बात कहना चाहता है वो बात और अच्छे से पाठक तक पहुँचाई जा सकती है। इसके लिए मैं लेखक से बातचीत करते हुए अपने सुझावों के पीछे के कारणों को देकर अपनी बात रख सकता हूँ। हो सकता है लेखक उन कारणों को सुनकर बात मान ले या फिर अपने पक्ष में मजबूत तर्क देकर मुझसे अपनी बात मनवा ले। सम्पादन के दौरान होने वाला ये तर्क वितर्क मुझे बड़ा मज़ेदार लगता है। इस दौरान काफी कुछ सीखने को मिलता है। और इससे कुछ बेहतर ही निकलता है। हालाँकि ये तभी हो पाता है जब सम्पादक और लेखक दोनों ही यह समझें कि बातचीत या बहस जो हो रही है वो किताब की बेहतरी के लिए हो रही है। सम्पादन प्रक्रिया अहम का टकराव न बन जाए। अहम बातों को मानने के आड़े आ जाता है तो मुझे लगता है नुकसान किताब का ही होता है। मेरी खुशकिस्मती रही है कि मेरे साथ ऐसा कम ही हुआ है। सभी लेखक ऐसे मिले हैं जो समझते हैं हम दोनों ही किताब की बेहतरी के लिए काम कर रहे हैं।

खैर, ये तो रही सम्पादन की प्रक्रिया। अब सम्पादित पुस्तकों के ऊपर आते हैं। मेरे पास अक्सर अपराध साहित्य और बाल साहित्य ही सम्पादित होने के लिए आता है पर सामाजिक उपन्यास का सम्पादन भी मुझे अच्छा लगता है। पिछले वर्ष और इस वर्ष भी कुछ किताबों के सम्पादन का मुझे मौका मिला। वैसे तो मुझे किताब के रिलीज़ के तुरंत बाद ही इधर पोस्ट कर देनी चाहिए थी। पर चलो देर आयद दुरुस्त आयद के तर्ज पर इन पुस्तकों की सूची इधर साझा कर रहा हूँ। आप भी देखिए, क्या पता आपको कुछ रुचिकर पढ़ने को मिल जाए:

सूरज पॉकेट बुक्स

  1. गुत्थी | लेखक: निखिल उप्रेती | प्रकाशन वर्ष: 2024 | पुस्तक लिंक: अमेज़न | जॉनर: अपराध कथा
  2. मुंबई गोआ क्रूज | लेखक: शुभानंद | प्रकाशन वर्ष: 2024 | पुस्तक लिंक: अमेज़न | जॉनर: अपराध कथा
  3. शक्ति भक्ति (प्रूफ रीडिंग) | लेखक: रुनझुन सक्सेना | प्रकाशन वर्ष: 2024 | पुस्तक लिंक: अमेज़न | जॉनर: आध्यात्मिक गल्प
  4. विनर | लेखक: अनुराग कुमार ‘जीनियस’ | प्रकाशन वर्ष: 2024 | पुस्तक लिंक: अमेज़न | जॉनर: अपराध कथा
  5. धुरंधर: सनक शिरोमणि | लेखक: देवेंद्र पांडेय | प्रकाशन वर्ष: 2025 | पुस्तक लिंक: अमेज़न | जॉनर: अपराध कथा
  6. मिस्टर एंड मिसेज़ धुरंधर | लेखक: देवेंद्र पांडेय | प्रकाशन वर्ष: 2025 | पुस्तक लिंक: अमेज़न | जॉनर: अपराध कथा

फ्लायड्रीम्स पब्लिकेशंस

  1. द रेलवे चिल्ड्रन | लेखक: एडिथ नेसबिट | अनुवाद: मोहम्मद अजीम | प्रकाशन वर्ष: 2024 | पुस्तक लिंक: अमेज़न | जॉनर: बाल साहित्य
  2. हार्डी बॉय: द टावर ट्रेज़र | लेखक: फ्रैंकलिन डब्ल्यू डिक्सन | अनुवाद: मोहम्मद अज़ीम खान | प्रकाशन वर्ष: 2026 | पुस्तक लिंक: अमेज़न | जॉनर: किशोर साहित्य
  3. अदृश्यम: दहशत, इच्छा, प्रतिशोध | लेखक: मन मोहन भाटिया | प्रकाशन वर्ष: 2026 | पुस्तक लिंक: अमेज़न | जॉनर: पारलौकिक गल्प

एम्बर ग्लो

  1. उजले कोट में | लेखक: अमरेन्द्र नाथ त्रिवेदी | प्रकाशन वर्ष: 2026 | पुस्तक लिंक: अमेज़न | जॉनर: संस्मरण

साहित्य विमर्श प्रकाशन

साहित्य विमर्श प्रकाशन में तो मैं टीम का हिस्सा ही हूँ इसलिए काफी पुस्तकों के सम्पादन का मौका मिल जाता है। यहाँ पर मैं 2025 के आखिरी दो माह और 2026 में अब तक प्रकाशित पुस्तकों को ही सूची में रख रहा हूँ।

  1. बेटियाँ सूरज की | लेखक: मनोहर चमोली | प्रकाशन वर्ष: नवंबर 2025 | पुस्तक लिंक: साहित्य विमर्श | जॉनर: बाल साहित्य
  2. जादूगर और लालची शिकारी | लेखक: रीता ग्रोवर | प्रकाशन वर्ष: नवंबर 2025 | पुस्तक लिंक: अमेज़न | जॉनर: बाल साहित्य
  3. कारसाज: द साइलेंट डिफरेंस मेकर | लेखक: संजय अग्निहोत्री | प्रकाशन वर्ष: 2026 | पुस्तक लिंक: अमेज़न | जॉनर: सामाजिक
  4. गाँव की मिट्टी मिटने नहीं देती | लेखक: सांता मिश्रा | प्रकाशन वर्ष: 2026 | पुस्तक लिंक: अमेज़न | जॉनर: संस्मरण
  5. दिल मदारी | | लेखक: पूनम अहमद | प्रकाशन वर्ष: 2026 | पुस्तक लिंक: अमेज़न | जॉनर: सामाजिक (रोमांस)
  6. सब अच्छा होगा: एक छोटी सी डॉक्टर की बड़ी सी कहानी | लेखक: समीर गांगुली | प्रकाशन वर्ष: 2026 | पुस्तक लिंक: अमेज़न | जॉनर: किशोर साहित्य
  7. भोजपुर की ठगी | लेखक: गोपालराम गहमरी | प्रकाशन वर्ष: 2026 | पुस्तक लिंक: अमेज़न | जॉनर: बाल साहित्य
  8. दूर देश से आई रुनझुन | लेखक: सुमन बाजपेयी | प्रकाशन वर्ष: 2026 | पुस्तक लिंक: अमेज़न | जॉनर: बाल साहित्य

तो यह वह किताबें थीं जिनके ऊपर कार्य करने का मौका मिला। इन पुस्तकों के विषय में अधिक जानकारी आपको सूची पर दिए पुस्तक लिंक पर मिल जाएगी। कुछ पसंद आया तो लीजिएगा और पढ़ेंगे तो अपनी राय से मुझे अवगत करवाना न भूलिएगा। सम्पादित किताब पाठकों को पसंद आती है तो लगता है कि अपनी ही किताब की तारीफ हो रही है। कुछ कमी पता चलती है तो आगे से ध्यान में रखने के लिए बिंदु मिल जाते हैं। दोनों में ही संपादक के रूप में अपना फायदा होता है।

अबसे आगे से कोशिश रहेगी कि काम मार्केट में आने के तुरंत बाद ही इधर खबर दे दूँ।

About विकास नैनवाल 'अंजान'

मैं एक लेखक और अनुवादक हूँ। फिलहाल हरियाणा के गुरुग्राम में रहता हूँ। मैं अधिकतर हिंदी में लिखता हूँ और अंग्रेजी पुस्तकों का हिंदी अनुवाद भी करता हूँ। मेरी पहली कहानी 'कुर्सीधार' उत्तरांचल पत्रिका में 2018 में प्रकाशित हुई थी। मैं मूलतः उत्तराखंड के पौड़ी नाम के कस्बे के रहने वाला हूँ। दुईबात इंटरनेट में मौजूद मेरा एक अपना छोटा सा कोना है जहाँ आप मेरी रचनाओं को पढ़ सकते हैं और मेरी प्रकाशित होने वाली रचनाओं के विषय में जान सकते हैं।

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