इंसा हूँ गिर गिर कर सम्भलता रहा हूँ | ग़ज़ल | विकास नैनवाल 'अंजान'

इंसा हूँ गिर गिर कर सम्भलता रहा हूँ

टूट टूट कर बार-बार मैं बनता रहा हूँ,इंसा हूँ गिर गिर कर सम्भलता रहा हूँ गमो के लिहाफ में लिपटी थी मेरी ज़िन्दगी,मैं गमों पर अपने बेसाख्ता, हँसता रहा हूँ …

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ग़मों की गठरी सीने में दबाकर लाया हूँ | ग़ज़ल | विकास नैनवाल 'अंजान'

लाया हूँ

ग़मों की गठरी सीने में दबाकर लाया हूँ,अश्कों को अपने,  तबस्सुम में छुपाकर लाया हूँ सुना, है बिकती इस जहाँ में हर एक चीज,सो जज़्बात अपने, मैं आज उठाकर लाया …

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ज़िंदगी और कोडिंग | कविता | विकास नैनवाल 'अंजान'

ज़िन्दगी और कोडिंग

काशये ज़िन्दगी होती कोडिंग सी,होते कुछ लॉजिकन होती ये इतनी इलोजिकलहोते कुछ फंक्शनझट से लोड करते हम लाइब्रेरी और बुला लेते उन्हेंफट से करवा लेते काम जो भी चाहते उनसे काश ये …

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झाँसी ओरछा की घुमक्कड़ी

झाँसी ओरछा की घुमक्कड़ी #5: मंदिर, हवेलियाँ ,छतरियाँ इत्यादि

03/12/2018 ओरछा किला और उसके अन्दर मौजूद अलग अलग महलों को हमने देख लिया था। अब चाय पीने की तलब लग गई थी। हम लोगों को अब मंदिरों की तरफ …

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बुरा नहीं है दर्द का होना | कविता | विकास नैनवाल 'अंजान'

दर्द

बुरा नहीं हैदर्द का होना,दिलाता है यहअहसासके तुम ज़िंदा हो,के है कुछ तो गलत,के है सुधार की उम्मीद,के काम करना है तुम्हे,के बदल रहा है कुछ बुरा नहीं हैदर्द का …

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बता रक्खा है | ग़ज़ल | विकास नैनवाल 'अंजान'

बता रक्खा है | विकास नैनवाल ‘अंजान’

काम काज को धता बता रक्खा है,जनता को सरकार से खफा बता रक्खा है जमा के मजमा ज़माने भर कानेता ने खुद को अब खुदा बता रक्खा है, सी कर …

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झाँसी ओरछा की घुमक्कड़ी

झाँसी और ओरछा की घुमक्कड़ी #4: ओरछा किला

3/12/2018 झाँसी का किला और रानी महल देखकर हम अपनी अगली मंजिल की तरफ बढ़ चले थे। यहाँ तक आपने पिछली कड़ी में पढ़ा। अब आगे: जहाँगीर महल की छत …

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घनघोर था अँधेरा, था चहूँ ओर सन्नाटा गहरा | कविता | विकास नैनवाल 'अंजान'

घनघोर था अँधेरा, था चहूँ ओर सन्नाटा गहरा

घनघोर था अँधेरा, था चहूँ और सन्नाटा गहराआकाश पे उड़ते चमगादड़ जाने किसका दे रहे थे पहरा,आसमान में छाए थे बादल ,और हमें सुनाई दी कुछ हलचल , अभी  खोया …

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इंसाँ हूँ, जीता जाता हूँ | विकास नैनवाल 'अंजान'

इंसाँ हूँ

बनता हूँ,बिगड़ता हूँ,टूटता हूँ,जुड़ता हूँ,बिखरता हूँ,सिमटता हूँ,इंसाँ हूँ,जीता जाता हूँ, सुख दुःखविरक्ति आसक्तिप्रेम घृणामहसूसता हूँइंसाँ हूँजीता जाता हूँ, शिकार हूँ,शिकारी भी,सिंह हूँ,हिरण भी,अच्छा हूँ,बुरा भी,कभी ये हूँ,कभी वो हूँइंसाँ हूँजीता …

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