‘इशिता की सूझबूझ’ मेरे द्वारा लिखी बाल कथा है। यह बाल कथा 8 से 10 वर्ष की उम्र के बच्चों को ध्यान रखकर लिखी गयी है। इसी कारण इस पैंतीस पृष्ठ की बाल कथा को छोटे छोटे आठ अध्यायों में विभाजित किया गया है ताकि आसानी से छोटे छोटे टुकड़ों में वह इसे पढ़ सकें। पुस्तक में 7 रंगीन चित्र भी मौजूद है।
यह बाल कथा साहित्य विमर्श प्रकाशन द्वारा प्रकाशित किया गया है।
पुस्तक विवरण:

इशिता के दो ही शौक थे। घूमना और पढ़ना। आज वो बहुत खुश थी क्योंकि आज उसे अपने दोनों ही शौक पूरा करने का मौका मिलने वाला था। मामा के घर घूमने जाना और साथ ही, मेट्रो में किताब पढ़ना।
पर वह कहाँ जानती थी कि आज का सफर कुछ अलग सा होने वाला था।
पुस्तक लिंक: साहित्य विमर्श