ज़ख्मो पर अपने मलहम लगाना सीख लिया

Image by Public Affairs from Pixabay ज़ख्मो पर अपने मलहम लगाना सीख लिया, गम में भी मैंने मुस्कराना सीख लिया रात स्याह हो तो हुआ क्या भला, बन जुगनू मैंने …

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मच्छर मारेगा हाथी को - अ रीमा भारती फैन फिक्शन

मच्छर मारेगा हाथी को – अ रीमा भारती फैन फिक्शन #2

2) चार दिन पहले, आईएससी हेड क्वार्टर  मैं चीफ खुराना के समक्ष उनके ऑफिस में बैठी थी। “रीमा, मैंने तुम्हे कहा था न कि तुम्हे अभी आराम करना चाहिए।” चीफ …

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रात!!

Image by Benjamin Balazs from Pixabay रात को  जब सो जाते हैं सारे, और मैं लेटा होता हूँ बिस्तर पर, नहीं होता कुछ भी करने को, न होता है कोई …

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मच्छर मारेगा हाथी को - अ रीमा भारती फैन फिक्शन

मच्छर मारेगा हाथी को – अ रीमा भारती फैन फिक्शन #1

भूमिका  वैसे तो हिन्दी पल्प साहित्य में बहुत किरदार हुए हैं जो कि मुझे पसंद आये हैं लेकिन रीमा भारती का मेरे लिए अपना एक अलग चार्म रहा है।  मुझे …

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इन फिजाओं में ये क्या पड़ा हुआ है,

Image by Free-Photos from Pixabay इन फिजाओं में ये क्या पड़ा हुआ है, क्यों नकाब हर चेहरे पर चढ़ा हुआ है, दफन करने पड़ते हैं सवाल भी हमें, ज़बाँ पर …

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जोधपुर जैसलमेर की घुमक्कड़ी

जोधपुर जैसलमेर की घुमक्कड़ी #1: गुरुग्राम से सराय रोहिल्ला

झाँसी और ओरछा की घुमक्कड़ी हो गई थी। इसके बाद नये साल का कुछ प्लान न था। ऐसे में 23 को राकेश भाई से बात हुई और बात होते होते …

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हुआँ हुआँ वो देख हमे चिल्लाता है | ग़ज़ल | विकास नैनवाल 'अंजान'

हुआँ हुआँ वो देख हमे चिल्लाता है,

सोशल मीडिया में आजकल चिल्लाने का चलन बढ़ चुका है। कभी कभी अपनी फीड देखता हूँ तो हर कोई चिल्लाता ही मालूम होता है। ऐसा नहीं है कि एक ही …

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इंसा हूँ गिर गिर कर सम्भलता रहा हूँ | ग़ज़ल | विकास नैनवाल 'अंजान'

इंसा हूँ गिर गिर कर सम्भलता रहा हूँ

टूट टूट कर बार-बार मैं बनता रहा हूँ,इंसा हूँ गिर गिर कर सम्भलता रहा हूँ गमो के लिहाफ में लिपटी थी मेरी ज़िन्दगी,मैं गमों पर अपने बेसाख्ता, हँसता रहा हूँ …

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ग़मों की गठरी सीने में दबाकर लाया हूँ | ग़ज़ल | विकास नैनवाल 'अंजान'

लाया हूँ

ग़मों की गठरी सीने में दबाकर लाया हूँ,अश्कों को अपने,  तबस्सुम में छुपाकर लाया हूँ सुना, है बिकती इस जहाँ में हर एक चीज,सो जज़्बात अपने, मैं आज उठाकर लाया …

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