
जी डी एस मीट : सेंट्रल पार्क 6 जनवरी 2019
6/01/2018 मैं सुबह उठा तो मौसम की हालत थोड़ी नासाज़ थी। रात को बारिश हुई थी और अभी भी बारिश की सम्भावना बनी हुई थी। ग्यारह बजे के करीब मुझे …
जी डी एस मीट : सेंट्रल पार्क 6 जनवरी 2019 Read Moreकिस बात की जल्दी है तू ठहर जरा, बैठ चाय पीते हैं दो बातें करते हैं
6/01/2018 मैं सुबह उठा तो मौसम की हालत थोड़ी नासाज़ थी। रात को बारिश हुई थी और अभी भी बारिश की सम्भावना बनी हुई थी। ग्यारह बजे के करीब मुझे …
जी डी एस मीट : सेंट्रल पार्क 6 जनवरी 2019 Read Moreमैं ज़बाँ से कुछ न कहता होऊँ मगर,तू न सोच कि दिल में मेरे जज्बात नहीं, कहने को तो कह दूँ मैं हाल ए दिल,पर अभी सही वक्त और हालात …
मैं ज़बाँ से कुछ न कहता होऊँ मगर Read Moreगूगल सर्च का प्रयोग हम लोग रोज मर्रा की ज़िन्दगी में करते ही रहते हैं। अगर आप इस लेख को पढ़ रहे हैं तो मैं ये मानकर चल रहा हूँ …
गूगल में बेहतर तरीके से सर्च कैसे करें? Read Moreकल ऑफिस से आ रहा था तो एक दोस्त की पोस्ट देखी। दोस्त का नाम अरुण यादव है। वो दिल्ली आया था और अब वापस जाते हुए उसने पोस्ट लिखी …
सीख लिया है Read More3/12/2018 झाँसी स्टेशन में उतरा, वहाँ पखाना काण्ड हुआ और उसके बाद राकेश भाई से मिलकर हम लोग बाइक में बैठकर झाँसी के किले की तरफ बढ़ चले। उससे पहले …
झाँसी और ओरछा की घुमक्कड़ी #3: झाँसी का किला और रानी महल Read More‘काश’,ये शब्द नहीं लाश है,उन इच्छाओं की,उस प्रेम की,उस टूटे रिश्ते की, जो डर, झिझक और अहम के चलते,न हो सके पूरे,न बन सके दोबारा, ऐसी लाशें,जिन्हें ढोना होता है …
काश!! Read More3/12/2018 मैंने दिल्ली से झाँसी पहुँच गया था। एक बार की चाय भी पी ली थी और किताबें भी ले ली थीं। यह सब आपने पिछली कड़ी में पढ़ा। अब …
झाँसी और ओरछा की घुमक्कड़ी #2: स्टेशन से किले की ओर Read More2 दिसम्बर 2018 की शाम से 3 दिसम्बर 2018 की सुबह तक रूम से नई दिल्ली रेलवे स्टेशन: प्ले देखने के बाद मैं रूम में पहुँच गया था। उधर से …
झाँसी और ओरछा की घुमक्कड़ी #1: दिल्ली से झाँसी Read Moreमैं किंडल स्टोर में अक्सर विचरण करता रहता हूँ। ये मेरे लिए ऐसा ही होता है जैसे बुक शॉप में जाकर किताबों को देखना। कुछ रुचिकर दिख जाता है तो …
किंडल में गलती से खरीदी गई किताबों को कैसे वापस करें? Read More2 दिसम्बर 2018, रविवार किताबी घुमक्कड़ी इस घुमक्कड़ी की आधारशिला की बात करूँ तो वो राजभारती का उपन्यास रंगमहल के प्रेत था। मैंने कुछ दिनों पहले यह उपन्यास पढ़ना खत्म …
दरियागंज संडे मार्किट: एक फक्कड़ घुमक्कड़ बना जब भुक्खड़ घुमक्कड़ Read More