ये यकीं हैं मुझे | विकास नैनवाल 'अंजान' | हिंदी कविता

ये यकीं हैं मुझे

फिर से मिलेंगे हम,ये यकीं है मुझे,वो वक्त और मोड़,शायद कोई और होगा,चेहरे पर पड़ चुकी होंगी झुर्रिया,बालों से झाँकने लगेंगी रजत लटें, फिर से मिलेंगे हम,ये यकीं है मुझे,मैं ऐसे …

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नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2019

नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2019

नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला समाप्त हो गया है। यह एशिया का सबसे बड़ा पुस्तक मेला है। और जब से मैं दिल्ली आया हूँ इसमें जरूर जाने की कोशिश करता …

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जी डी एस मीट : सेंट्रल पार्क 6 जनवरी 2019

जी डी एस मीट : सेंट्रल पार्क 6 जनवरी 2019

6/01/2018 मैं सुबह उठा तो मौसम की हालत थोड़ी नासाज़ थी। रात को बारिश हुई थी और अभी भी बारिश की सम्भावना बनी हुई थी। ग्यारह बजे के करीब मुझे …

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मैं ज़बाँ से कुछ न कहता होऊँ मगर | विकास नैनवाल 'अंजान'

मैं ज़बाँ से कुछ न कहता होऊँ मगर

मैं ज़बाँ से कुछ न कहता होऊँ मगर,तू  न सोच कि दिल में मेरे जज्बात नहीं, कहने को तो कह दूँ मैं हाल ए दिल,पर अभी सही वक्त और हालात …

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गूगल में बेहतर तरीके से सर्च कैसे करें?

गूगल सर्च का प्रयोग हम लोग रोज मर्रा की ज़िन्दगी में करते ही रहते हैं। अगर आप इस लेख को पढ़ रहे हैं तो मैं ये मानकर चल रहा हूँ …

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झाँसी ओरछा की घुमक्कड़ी

झाँसी और ओरछा की घुमक्कड़ी #3: झाँसी का किला और रानी महल

3/12/2018 झाँसी स्टेशन में उतरा, वहाँ पखाना काण्ड हुआ और उसके बाद राकेश भाई से मिलकर हम लोग बाइक में बैठकर झाँसी के किले की तरफ बढ़ चले। उससे पहले …

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काश | कविता | विकास नैनवाल 'अंजान'

काश!!

‘काश’,ये शब्द नहीं लाश है,उन इच्छाओं की,उस प्रेम की,उस टूटे रिश्ते की, जो डर, झिझक और अहम के चलते,न हो सके पूरे,न बन सके दोबारा, ऐसी लाशें,जिन्हें ढोना होता है …

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झाँसी ओरछा की घुमक्कड़ी

झाँसी और ओरछा की घुमक्कड़ी #2: स्टेशन से किले की ओर

3/12/2018 मैंने दिल्ली से झाँसी पहुँच गया था।  एक बार की चाय भी पी ली थी और किताबें भी ले ली थीं। यह सब आपने पिछली कड़ी में पढ़ा।  अब …

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झाँसी ओरछा की घुमक्कड़ी

झाँसी और ओरछा की घुमक्कड़ी #1: दिल्ली से झाँसी

2 दिसम्बर 2018  की शाम से 3 दिसम्बर 2018  की सुबह तक  रूम से नई दिल्ली रेलवे स्टेशन: प्ले देखने के बाद मैं रूम में पहुँच गया था। उधर से …

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