ये यकीं हैं मुझे
फिर से मिलेंगे हम,ये यकीं है मुझे,वो वक्त और मोड़,शायद कोई और होगा,चेहरे पर पड़ चुकी होंगी झुर्रिया,बालों से झाँकने लगेंगी रजत लटें, फिर से मिलेंगे हम,ये यकीं है मुझे,मैं ऐसे …
ये यकीं हैं मुझे Read Moreकिस बात की जल्दी है तू ठहर जरा, बैठ चाय पीते हैं दो बातें करते हैं
फिर से मिलेंगे हम,ये यकीं है मुझे,वो वक्त और मोड़,शायद कोई और होगा,चेहरे पर पड़ चुकी होंगी झुर्रिया,बालों से झाँकने लगेंगी रजत लटें, फिर से मिलेंगे हम,ये यकीं है मुझे,मैं ऐसे …
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नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला समाप्त हो गया है। यह एशिया का सबसे बड़ा पुस्तक मेला है। और जब से मैं दिल्ली आया हूँ इसमें जरूर जाने की कोशिश करता …
नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2019 Read More
6/01/2018 मैं सुबह उठा तो मौसम की हालत थोड़ी नासाज़ थी। रात को बारिश हुई थी और अभी भी बारिश की सम्भावना बनी हुई थी। ग्यारह बजे के करीब मुझे …
जी डी एस मीट : सेंट्रल पार्क 6 जनवरी 2019 Read More
मैं ज़बाँ से कुछ न कहता होऊँ मगर,तू न सोच कि दिल में मेरे जज्बात नहीं, कहने को तो कह दूँ मैं हाल ए दिल,पर अभी सही वक्त और हालात …
मैं ज़बाँ से कुछ न कहता होऊँ मगर Read More
गूगल सर्च का प्रयोग हम लोग रोज मर्रा की ज़िन्दगी में करते ही रहते हैं। अगर आप इस लेख को पढ़ रहे हैं तो मैं ये मानकर चल रहा हूँ …
गूगल में बेहतर तरीके से सर्च कैसे करें? Read More
कल ऑफिस से आ रहा था तो एक दोस्त की पोस्ट देखी। दोस्त का नाम अरुण यादव है। वो दिल्ली आया था और अब वापस जाते हुए उसने पोस्ट लिखी …
सीख लिया है Read More
3/12/2018 झाँसी स्टेशन में उतरा, वहाँ पखाना काण्ड हुआ और उसके बाद राकेश भाई से मिलकर हम लोग बाइक में बैठकर झाँसी के किले की तरफ बढ़ चले। उससे पहले …
झाँसी और ओरछा की घुमक्कड़ी #3: झाँसी का किला और रानी महल Read More
‘काश’,ये शब्द नहीं लाश है,उन इच्छाओं की,उस प्रेम की,उस टूटे रिश्ते की, जो डर, झिझक और अहम के चलते,न हो सके पूरे,न बन सके दोबारा, ऐसी लाशें,जिन्हें ढोना होता है …
काश!! Read More
3/12/2018 मैंने दिल्ली से झाँसी पहुँच गया था। एक बार की चाय भी पी ली थी और किताबें भी ले ली थीं। यह सब आपने पिछली कड़ी में पढ़ा। अब …
झाँसी और ओरछा की घुमक्कड़ी #2: स्टेशन से किले की ओर Read More
2 दिसम्बर 2018 की शाम से 3 दिसम्बर 2018 की सुबह तक रूम से नई दिल्ली रेलवे स्टेशन: प्ले देखने के बाद मैं रूम में पहुँच गया था। उधर से …
झाँसी और ओरछा की घुमक्कड़ी #1: दिल्ली से झाँसी Read More