नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 10 से 18 जनवरी के बीच भारत मंडपम में आयोजित हुआ था। इस बार सभी दिन पुस्तक मेले में होते हुए भी मेले का आनंद उठाने का मौका कम मिला। काम चूँकि ज्यादा था तो काम ही होता रहा। टहलने की फुरसत कम ही मिली। बस कल (18 जनवरी 2026) को थोड़ा सा समय चुराकर अपने दोस्त शशि भूषण कुमार को साथ लेकर बिजली की गति से थोड़ा कम गति से इधर-उधर जाकर ये नगीने चुने।
जब मैं पुस्तक मेले जाता हूँ तो मेरी कोशिश रहती है कि पुस्तक मेले से ऐसी किताबें लाऊँ जिनके विषय में मेले में आने से पहले मुझे पता ही नहीं रहा हो। जिन पुस्तकों के बारे में पता होता है उन्हें तो ऑनलाइन भी मँगवा सकते हैं। इसलिए मैं पुस्तक मेले जाता हूँ तो कभी लिस्ट लेकर नहीं जाता। कोशिश रहती है स्टॉलों पर जाया जाए और टहलते हुए कुछ पसंद आये तो उन्हें चुन लिया जाए। फिर चाहे उस किताब के लेखक से आप वाकिफ न हो।
इस बार भी दोस्तों की किताबें (लागी तुमसे लगन, सरहद पार, गयी भैंस पानी में, कालगृह, राजनगर: इंस्पेकर राजन केस फाइल्स) को छोड़कर एक ‘पनाळ’ और टिहरी की जलसमाधि ही ऐसी किताबे थी जिनको लेने का इरादा करके गया था और ले पाया। कुछ दोस्तों की किताबें तो फिर भी लेने से रह गयीं। वहीं मेले में इस बार खरीदी गयी ‘अक्कड़ बक्कड़’ को पढ़ने की सलाह प्रांजल सक्सेना जी (हाथीस्थान: गजप्रलय की आहट , भूतिया मास्साब, गाँव वाला अंग्रेज़ी स्कूल, महानपुर के नेता के लेखक) ने मेले में ही दी थी। बाकी खरीदी हुई अधिकतर किताबें ऐसी रही जिनके अस्तित्व का भी भान नहीं था। अधिकतरों के तो लेखकों को भी मैं नहीं जानता हूँ और न उनका लिखा पहले कभी पढ़ा है। बस स्टॉल में गया, टहला और उलटते पुलटते ये किताबें जँच गयीं तो इन्हें ले आया।
वैसे तो मुझे कई स्टॉलों पर जाना था लेकिन समय की कमी के चलते नहीं जा पाया। अक्सर पुस्तक मेलों में दोस्त देव प्रसाद (खौफ कदमों की आहट, रहस्यमयी सफर, लौट आया नरपिशाच, नरपिशाच, कब्रिस्तान वाली चुड़ैल, अभिशप्त रूपकुंड के लेखक )भी आता है। उसके साथ मेले का लम्बा चक्कर लगता है। देव ने इस बार भी आना था लेकिन उसने भी आखिरी मौके पर धोखा दे दिया वरना ये चक्कर लम्बा लगता और किताबें अधिक आती।
खैर, जो किताबें ली उनकी सूची नीचे दे रहा हूँ।
- लागी तुमसे लगन – शोभा शर्मा (कविता संग्रह) (फ्लाईड्रीम्स प्रकाशन)
- सरहद पार – अर्चना त्यागी (कहानी संग्रह) (इंक पब्लिकेशन)
- गयी भैंस पानी में – राजीव तनेजा (व्यंग्य संग्रह) (अद्विक प्रकाशन)
- कालगृह: छायाओं का संधान – अभिनव जैन (उपन्यास) (पृष्टि प्रकाशन)
- राजनगर: इंस्पेक्टर राजन केस फाइल्स – डॉ अर्चित श्रीवास्तव (उपन्यास) (पृष्टि प्रकाशन)
- अक्कड़-बक्कड़ – सुभाष चंदर (भावना प्रकाशन)
- टिहरी की जलसमाधि: एक दस्तावेज – महिपालसिंह नेगी (समय साक्ष्य प्रकाशन)
- पनाळ अनुवाद:कांता घिल्डियाल (कहानी संकलन ) (समय साक्ष्य प्रकाशन) (चयनित गढ़वाली कहानियों का हिंदी अनुवाद)
- भ्यासकथा तथा अन्य कहानियाँ – अनिल कार्की ( कहानी संग्रह) समय साक्ष्य प्रकाशन
- उन्माद – भगवान सिंह (उपन्यास) (सस्ता साहित्य मंडल)
- भविष्य की सैर – कल्पना कुलश्रेष्ठ ( विज्ञान कथा संग्रह) (सस्ता साहित्य मंडल)
- काली कलूटी जामुन – कमल वर्मा (बाल कथा) (सस्ता साहित्य मंडल)
- स्वर्णघाटी की जनगाथा – मनोज दास,अनुवाद: सुधा सिन्हा (बाल फैंटेसी उपन्यास) (सस्ता साहित्य मंडल)
- रोमांचक कथाएँ – सं: अनंत कुशवाहा (कहानी संकलन) (पत्रिका प्रकाशन)
- साहस की कहानियाँ – सं: तारकेश्वर शर्मा (कहानी संकलन) (पत्रिका प्रकाशन)
- साहस कथाएँ – सं: सुधीर सक्सेना (कहानी संकलन) (पत्रिका प्रकाशन)
- भैरवी: प्रेतबाधा से पीड़ित स्त्री की आत्मकथा – राजेश शर्मा (सच्ची घटना पर आधारित उपन्यास) (पत्रिका प्रकाशन)


बाकी इस बार का पुस्तक मेला भी बहुत सारी यादें दे गया। कोशिश रहेगी कि अगली पोस्ट में उन यादों को और पुस्तक मेले के अपने अनुभव को यहाँ लिपिबद्ध कर सकूँ। देखिएगा हो पता है या नहीं।
फिलहाल के लिए ये बताइये क्या आप नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले में गये थे? आपने क्या क्या खरीदा?

बहुत बढ़िया 👌👌मेरे उपन्यास को अपनी सूची में शामिल करने के लिए आपका धन्यवाद🙏🙏
जी जल्द ही पढ़कर राय देने की कोशिश करूँगा।