किधर जाएँ
यूँ ही ऑफिस में बैठकर कुछ पंक्तियाँ मन में उभरी थी तो उन्हें गूगल ड्राइव के दस्तावेज में नोट कर दिया था। कुछ भी पुख्ता नहीं बन पाया था। यह पिछले …
किधर जाएँ Read Moreकिस बात की जल्दी है तू ठहर जरा, बैठ चाय पीते हैं दो बातें करते हैं
यूँ ही ऑफिस में बैठकर कुछ पंक्तियाँ मन में उभरी थी तो उन्हें गूगल ड्राइव के दस्तावेज में नोट कर दिया था। कुछ भी पुख्ता नहीं बन पाया था। यह पिछले …
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आजकल टीवी देखना बहुत कम हो गया है। अब मुश्किल से आधा घंटा ही टीवी देखता हूँ और इस कारण विज्ञापन कैसे हो चले हैं उनसे काफी कम परिचित हूँ। …
कैसे कैसे विज्ञापन?? Read More
यह यात्रा 30 सितम्बर 2018 को की गई पिछले सप्ताह की शुरूआत में चित्रकूट जाने का प्लान बना था। उधर दीपक भाई रहते हैं और उन्होंने समूह के सारे सदस्यों …
मेरठ की एक शाम, संगीत,नृत्य और साहित्य की जुगलबंदी के नाम Read More
(व्हाटसैप के एक समूह में दोस्तों के साथ बातचीत चल रही थी। इस समूह में एक मित्र ने अपने जीवन की कुछ घटना बताई और उनकी टांग खींचने के लिए …
पेशावरी हसीना Read More
यह यात्रा 14/7/17 से 21/7/2017 के बीच की गई शुक्रवार रात और शनिवार तड़के (कहते हैं देर आयद दुरुस्त आयाद। यही बात इस वृत्तांत के विषय में भी चरित्रार्थ हो …
फूलों की घाटी #1: दिल्ली से हरिद्वार Read More
(कहानी को फ्रेंच भाषा से अंग्रेजी में M. Charles Sommer ने अनुवाद किया था। मैंने इस अनुवाद से हिन्दी में अनुवाद किया है।) हम कुर्की के क़ानून के ऊपर बात कर …
साया – मोपासां की कहानी अ घोस्ट का हिन्दी अनुवाद Read Moreकई बार चीजें अपने आप ही हो जाती हैं। उदाहरण के लिए आज हुई घटना को ले लें। जब मैं ऑफिस से निकला था तो मेरे मन में सीधे कमरे …
रैंडम विचार १ Read More
(‘तोताराम’ और ‘इलाइची’ मेरे जेहन से निकले दो किरदार हैं। कभी कभी मन के किसी कोने से उभर कर आ जाते हैं और अपनी दुनिया की झलक सी दिखा जाते …
मिस एडवेंचर्स ऑफ़ तोताराम #2 Read More
हम जब भी ब्लॉगर पर पोस्ट लिखते हैं तो हमारा ध्येय यही होता है की वह पोस्ट अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचे। यह तब ही मुमकिन है जब पाठक …
अपने ब्लॉग पोस्टस को व्यवस्थित कैसे करें? Read More
यह यात्रा 7/9/2018, शुक्रवार को की गई अपने ननिहाल गये हुए काफी वक्त हो चुका था। पिछली बार दो हजार सोलह में अक्टूबर के महीने गया था। यह प्राइवेट नौकरी …
मोल्ठी #2 :बस्ग्याल तभी मनेलु जब छोया फुट्ला(बरसात तभी मानी जायेगी जब छोया फूटेंगे) Read More